Friday, 30 May 2014

अनन्नास

अनन्नास अन्नानास मे पाये जाने वाले रसायनिक तत्व एवं एन्टी ऑक्सीडेट शरीर के रक्त स्तर के साथ–साथ मानसिक स्तर को भी दुरस्त रखता है। जो व्यक्ति अन्नानास का प्रतिदिन सेवन करते हैं, वह व्यक्ति जानते हैं कि अन्नानास उन्हें दिन भर क्रिएटिव व ऊर्जावान रखता है। अन्नानास में पाये जाने वाले विटामिन ए, बी, सी व मैग्नेशियम, पोटेशियम व क्तिशाली एन्टीऑक्सीडेट फीरेडिकल्स को नष्ट करने के लिए उनके साथ लड़ते हैं व बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करते हैं।

Thursday, 29 May 2014

अमरूद

अमरूद

बरसात और सर्दियों के दिनों में आपको अमरूद बहुतायत में दिखायी पड़ते हैं। देखने में हरे और लाल रंग के अमरूद लोगों को काफी पसंद आते है। ये खाने में तो स्वादिष्ट होते ही है साथ ही ये सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होते हैं। क्या आपको पता है कि अमरूद में विटामिन सी की मात्रा बहुत अधिक होती है जिससे स्किन डिजीज यानी त्वचा संबधित रोग नहीं होते हैं। ये चेहरे को कांतिमय बनाता है। इसमें विटामिन,फाइबर और मिनरल प्रचुर मात्रा में होता है। ये कब्जित को दूर करता है। जिन के नाक-कान से खून आता है उन्हें भी अमरूद का सेवन करना चाहिए। साथ ही एसिडिटी, अस्थमा, ब्लडप्रेशर, मोटापा आदि समस्याओं में फायदा पहुंचाता है। कोलेस्ट्रॉल लेवल कम करता है। ये पित्त रोगों में भी मददगार होता है। वैसे भी अमरूद ऐसा फल है जो लोगों की जेब का भी हिसाब रखता है इसलिए अगर आप भी सुंदर और स्वस्थ बनना चाहते है वो भी किफायती दाम में तो आज से ही अमरूद का सेवन शुरू कर दें।

अमर बेल

अमर बेल


- अमरबेल के चूर्ण को सोंठ और घी मिलाकर लेप करने से पुराना घाव भरता है या इसके बीजो को पीसकर पुराने घाव पर लेप करें, इससे घाव ठीक हो जाता है।
1. पहचाने- अमरबेल बिना जड़ का पीले रंग का परजीवी पौधा है। यह पेड़ों के ऊपर अपने आप उग आती है। बिना जड़ के पौधों पर ऊपर की ओर चढ़ता है। इसमें गुच्छों में सफेद फूल लगे होते हैं।
2. उपयोग-  कैसी भी खुजली हो, अमरबेल पीसकर उस पर लेप करने से खुजली खत्म हो जाती है। 
3.पेट फूलने एवं आफरा होने पर इसके बीज जल में उबालकर पीस लें। इसका गाढ़ा लेप पेट पर लगाने से आफरा और उदर की पीड़ा खत्म होती है।
4.खून की खराबी होने पर कोमल ताजी फलियों के साथ तुलसी की चार-पांच पत्तियां चबा-चबाकर चूसना चाहिए।
5. इसके पत्तों का रस पीने से मूत्र संबंधी विकार दूर होते हैं। 
6. अमरबेल के फूलों का गुलकंद बनाकर खाने से याददाश्त में वृद्धि होती है।
7. अमरबेल को पानी में उबालकर उससे सूजन वाली जगह की सिकाई करें। कुछ दिनों तक इसका इस्तेमाल करने पर सूजन कम हो जाती है।
8 . इसके पत्तों का रस में सादा नमक मिलाकर दांतों पर मलने से दांत चमकीले होते हैं।
9.अमरबेल की टहनी का दूध चेहरे पर लगाने से गजब का निखार आता है।


यह प्रयोग करने से महावारी नियमित होती है। 

Wednesday, 28 May 2014

अमलतास

अमलतास अमलतास का पेड़ काफी बड़ा होता है, जिसकी ऊंचाई 25-30 फुट तक होती है। इसके पेड़ की छाल ... लिए होती है। अमलतास मधुर, प्रकृति में शीतल, भारी, कफनाशक और पेट साफ करने वाला है।

  पित्त प्रकोप :अमलतास के गूदे के 40-60 मिलीलीटर काढ़े में 5-10 ग्राम इमली का गूदा मिलाकर सुबह-सुबह पिलाने से पित्त प्रकोप में लाभ होता है। यदि रोगी को कफ की अधिकता हो तो इसमें थोड़ा निशोत का चूर्ण भी मिलाना चाहिए।
    लाल रंग के निशोत के काढे़ के साथ अमलतास की मज्जा का कल्क मिलाकर अथवा बेल के काढ़े के साथ अमलतास की मज्जा का कल्क, नमक एवं शहद मिलाकर पित्त की प्रधानता में 10-20 मिलीलीटर की मात्रा में पीना चाहिए।


       अमलतास के गूदे का 40-60 मिलीलीटर काढ़ा पित्तोदर में लाभप्रद है।

अलसी

अलसी अलसी के बीज के चमत्कारों का हाल ही में खुलासा हुआ है कि इनमें 27 प्रकार के कैंसररोधी तत्व खोजे जा चुके हैं। अलसी में पाए जाने वाले ये तत्व कैंसररोधी हार्मोन्स को प्रभावी बनाते हैं, विशेषकर पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर व महिलाओं

अलसी

अलसी अलसी के बीज के चमत्कारों का हाल ही में खुलासा हुआ है कि इनमें 27 प्रकार के कैंसररोधी तत्व खोजे जा चुके हैं। अलसी में पाए जाने वाले ये तत्व कैंसररोधी हार्मोन्स को प्रभावी बनाते हैं, विशेषकर पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर व महिलाओं

Tuesday, 27 May 2014

पेट में कीड़े



1.      पेटमें कीड़े


कई बार किन्ही कारणों से पेट में कीड़े हो जाते हैं जिनसे
काफी पीड़ा होती है | पेट में पाए जाने वाले कीड़ों के सामान्य
लक्षण है --- सोते हुए दाँत पीसना ,शरीर का रंग
पीला या काला होना , भोजन से अरुचि , होंठ सफ़ेद होना , शरीर
में सूजन होना आदि | तो आइए जानते हैं इनसे छुटकारा पाने के

1.-अनार के छिलकों को सुखाकर चूर्ण बना लें | यह चूर्ण दिन में
तीन बार एक -एक चम्मच लें , इससे

http://jkhealthworld.com/hindi/%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%97

-
2.  पके अनार के 10 ग्राम रस में भुना हुआ जीरा और गुड़ समान
मात्रा में मिलाकर दिन में दो या तीन बार लें। पाचन
शक्ति की दुर्बलता दूर होगी।
-
काली राई 2-4 ग्राम लेने से कब्ज से होने
वाली बदहजमी मिट जाती है।
-
अनानास के पके फल के बारीक टुकड़ों में सेंधा नमक और
काली मिर्च मिलाकर खाने से पाचन शक्ति बढ़ती है।
-
भोजन करने के बाद बेचैनी महसूस हो तो अनानास का रस...

Friday, 9 May 2014

अजवाइन से उपचार


 भोजन पकाते वक्‍त हम अवायन का काफी प्रयोग करते हैं। यह बहुत ही गुणकारी होती है इसलिये इसको हम चाह कर भी नजहर अंदाज नहीं कर सकते। घरों में तो अजवाइन का खट्टा-मीठा चूरन भी बनाकर रखा जाता है जो अक्सर खाने के बाद सेवन मे लायाअजवाइन से उपचार

Friday, 2 May 2014

समाधि

समाधि -  समाधि योग के यय में पूर्ण अद्धा के साथ साधक जुट जाता है तो इस उददेश्य  के लिए अनावश्यक उल प्राप्त होती है

प्रत्याहार

प्रत्याहार- स्वामी विवेकानंद ने प्रत्याहार की साधना का सरल मार्ग बताया है। वे कहते हैं मन को संयत करने के लिए-. कुछ समय चुपचाप बैठें और मन को उसके अनुसार चलने दें। मन में विचारों की हलचल होगी, बुरी भावनाएं प्रकट होंगी। सोए संस्कार जाग्रत

ध्यान

ध्यान - कैसे करें ध्यान? यह महत्वपूर्ण सवाल अक्सर पूछा जाता है। यह उसी तरह है कि हम पूछें कि कैसे श्वास लें, कैसे जीवन जीएं, कैसे जिंदा रहें या कैसे प्यार करें। आपसे सवाल पूछा जा सकता है कि क्या आप हंसना और रोना सीखते हैं या कि पूछते हैं कि कैसे

Thursday, 1 May 2014

धारणा

धारणा - धारणा अष्टांग योग का छठा चरण है। इससे पहले पांच चरण यम, नियम, आसन, प्राणायाम और प्रत्याहार हैं जो योग में बाहरी साधन माने गए हैं। इसके बाद सातवें चरण में ध्यान और आठवें में समाधि की अवस्था प्राप्त होती है। धारणा का

प्राणायाम की क्रिया

प्राणायाम की क्रिया - शरीर की रोग निरोधक शक्ति बढ़ती है और मन का सिमटाव होता है। प्राणायाम करते समय श्वास-प्रश्वास संबंधी तीन क्रियाएं की जाती हैं। श्वास अन्दर ग्रहण करने की क्रिया को 'पूरक' श्वास और छोड़ने की क्रिया को 'रेचक' तथा श्वास रोकने

प्राणायाम

प्राणायाम- अनुलोम –विलोम प्रणायाम में सांस लेने व छोड़ने की विधि को बार-बार दोहराया जाता है। इस प्राणायाम को 'नाड़ी शोधक प्राणायाम' भी कहते है। अनुलोम-विलोम को रोज करने से शरीर की सभी नाड़ियों स्वस्थ व निरोग रहती है। इस प्राणायाम को हर उम्र के

सूर्य चिकित्सा द्वारा उपचार

सूर्य चिकित्सा द्वारा उपचार

एनिमा

एनिमा